आस

झूठा ही सही एक बार मुझे मर के देखना था

जनाज़े में कौन होता है शामिल ये देखना था


हरदम जो जताते थे है दिल बडा दरिया हमारा

क्या ऑंखसे उनके समंदर बहेगा ये देखना था


ताउम्र बोझ उठाये कइयोंका, कंधा कौन देगा

कौन दोस्त और कौन दुश्मन, बस ये देखना था


हमेभी आपसे मुहोब्बत है वो बोल न सके कभी

आज उनके चेहरेपे इजहार ए इश्क़ देखना था


पता नही जीतेजी हमे क्यों याद करता था कोई

किसके दिलसे आज मेरा जनाजा उठा देखना था






अच्छी बात

मेरी तरफ देख तेरा मुस्कुराना अच्छी बात नहीं

मरे हुए नादानको और मारना अच्छी बात नहीं


हिसाब रखता हूं मैं तेरे साथ बिताए हर पलका 

वक्तकी तिश्नगीको प्यासा रखे अच्छी बात नहीं


दराज-तर सफर बहुत कठिन है मगर तेरे सिवा 

बिना कोशिश अलविदा कहना अच्छी बात नहीं


हूँ वाकिफ तेरे रूह के रग रग से ऐ मेरे हमनवा

पर मैं तुम्हें अबभी अनजान हु अच्छी बात नही