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ओल्या केसानिशी

अशीच ये समोरी ओल्या केसानिशी
मागितले काही तर म्हणू नको नाही

झाकला चेहरा कशाला या बटानी
तरीच चांदणे अजून पडलेच नाही

पहात रहावे आर्जव डोळ्यातले मी
मिठीत घेण्याचेही आज भान नाही

येतेस जवळ काळसुद्धा स्तब्ध होतो
शब्दांना बोलणे कसे ठाउक नाही

ओलेता स्पर्श जाणवतो ओठांना
जागेपणी कधी असे घडलेच नाही

आठवता तू नेहमी का हरवून जातो 
वेंधळ्या मना स्वप्नी मी पाठवत नाही










जीवन मला लाभले


केले आहे प्रेम मी, देऊ किती दाखले 
ऐश्वर्य कुबेराचे, आज मला लाभले. 

न बोलता न सांगता, तुझीच मी झाले 
संपले दुःख तेही, सुख मला लाभले. 

नसशी जवळ तु, काही आठवले 
एकटे पण गोड, विरह मला लाभले. 

त्या कोवळ्या फुलांचे, स्पर्श सांगून गेले. 
मनात काही शोधता, ते क्षण मला लाभले 

न राहवून मी, आरशात पाहिले 
हरवलेले कधीचे, हास्य मला लाभले. 

भेटता तु वाटेवर, श्वास एक झाले 
उमलत्या आशेत, जीवन मला लाभले.


                                





मजदुर





दिनभर इस पेट के 
लिये काम करते है 
शरीर के बाकी अंग
रातमे याद आते है!

                              
          


सुधाकर

सर्व काही असून  सुद्धा 

तुजविन चित्र अपूर्ण आहे

सर्व काही नसूनही तू

असशील तर संपूर्ण आहे


जागेपणी तुझे आभास

कल्पना स्वप्न नोहे

खोट्याविना खऱ्याची

किंमत अपूर्ण आहे


हिंदोळ्यावर हुंदके

छाती दडपली आहे

लटक्या भांडणाविना

संवाद अपूर्ण आहे


गुंतवशील कसे मला

शब्द शब्द मूक आहे

मिठीशिवाय माझ्या

तुझा राग अपुर्ण आहे


रात्र पहाटेला मिळे

सुधाकर मावळूदे

भेट तुझी नी माझी 

अथवा अपूर्ण आहे


निघतेस मात्र जेव्हा

थांबवु तुला कसे

वेळ विचित्र आहे

काळ अपूर्ण आहे

                                 

  





रुबाई

 

गझल लिखू, पर समा बया कर नही सकता

तेरे बारेमे सोच सकु, पर तुझे पा नही सकता


ढूंढता हु नजदीक तेरे, न होने की वजह 

इजहार ऐ इश्क़ मगर, कर नही सकता


मलमली अहसास ही काफी है, पास होनेका

मजा नही बिन तेरे, बारिश में भीग नही सकता


शुक्रगुजार हूं जिंदगी ने कभी तुझसे मिलाया

एतराज़ है, मक़रूज़ हु, कर्ज चुका नही सकता


तू मेरी रुबाई है, सिवा तेरे न-मुकम्मल जीना

चाहना चाहता हु, मगर तुझे खो नही सकता






इमले

 

आपण मनात बांधत राहतो इमले

यावं करिन आणि त्याव होईल

पण घंटा काहीच कुठे होत नाही

एक कप चहाने तल्लफ मिटत नाही


निघताना असतो शर्ट इस्त्री केलेला

भांग व्यवस्थित, सेन्ट सुवासिक

गर्दीला यातलं काहीच कळत नाही

एखाद्या शिवीने भांडण मिटत नाही


घरदार असत बऱ्यापैकी आणि कुटुंब

आरामात भागतात दैनंदिन गरजा

मत्सर मात्र मनाला सोडावीत नाही

पुढे पळण्याची तहान काही मिटत नाही


तरुणपणी असते ढीगभर ऊर्जा

सळसळत रक्त, उर्मी, आणि ईर्षा

म्हातारपणाला कशाचा गंध नाही

पाहिजे तेव्हा मात्र डोळा मिटत नाही




इश्के दी चाशनी


कभी कभी मुझे तुम जलेबी की तरह लगती हो

चाश्नी में डूबी हुई सी, जब मुझसे बाते करती हो

हम मरकज़ चक्कर काटती हुई मेरे इर्द गिर्द (concentric)

मरोडनेपे जिसको, दिल से मानो प्यार बहता हो


तुम काजुकतली होने की संभावना ज्यादा है

वही एक है जो तुमसे सादगी सीखी है

उसकी दुनिया चाहे कितनीही गोलमटोल हो

लेकिन मेरे लिए त्रिकोनी हिरे जैसी है 


खीर होती है थोड़ी पतली थोड़ी गाढ़ी

ठीक वैसेही मिजाज जब तुम मुझे डाटती हो

मैं बस देखता हूं तेरी आँखोंको और सोचता हूं

केसर की तरह घुल जाऊ इस फिरनी में


बहुत कम देखा है तुम्हे शरमाते हुए

जब भी शरमाती हो, हाथोंसे चेहरा छुपाके

जैसे गुजिया के अंदर गुड़ का हो पूरण

और मेरे लब्ज घी का काम करते रहे ।


कभी मेरे लिए हो सोनपापड़ी 

तो कभी हो रंगबिरंगी बर्फी

या कहु रसभरी रसमलाई

या कहु मीठी ठंडी रबड़ी


नाम कई है तेरे दुनिया के लिए


मेरे लिए हो बस .....

इश्के दी चाशनी ।

                                       


सिंबा

 

धरती पे खुदा का क़ासिद है तू

मेरे लिए खुदासे बढ़कर है तू ।


तेरी खामोशी तेरी बेजुबानी है

तेरी जुबान तेरी दिल्लगी है ।


बेहद वफादारी तेरी कमजोरी है

इंसानी दुनिया आना तेरी भूल है।


पाकीजा दिल कभी आया हिस्से मेरे

नेक काम शायद हुए किसी जनम मेरे


मुहलत इतनी छोटी क्यो मिली तुम्हे

बगैर तेरे क्यों काटनी ये लंबी उम्र हमे


अगले जनम बन जाना तुम मेरे आका

कुछ तो कर्ज चुका सकु ये जिन्दगीका


बस कभी बात फुरकत की न कर तू

मेरे लिए, मुझसे, खुदासे, बढ़कर है तू ।

‌

‌

आहिस्ता

फूल नही रुत ए बहार लायी थी जिंदगी में

छोड़कर मुझे जाना है, जाइये आहिस्ता आहिस्ता ।


उम्र बित जाती है जहनको समझने में

आगाज़ ही उलझने बढा रहा है , आहिस्ता आहिस्ता ।


क्यो तुझसे दिलकशी, अनजान हु मैं

इंतज़ार अब जहर बन रहा है, आहिस्ता आहिस्ता ।


खुदा है करामाती, देर क्यों नतीजेमे

वक्त उम्मीद कोताह कर रहा है, आहिस्ता आहिस्ता ।


क्यो जवान यादोँसे रुक्सत करू तुम्हे

मुकाबला मौत जीतेगी तय है, पर आहिस्ता आहिस्ता ।

‌

अक्स

 

देखते रहे , जब देखती हो आईना

सुना तेरे हुस्न के चर्चे, हर गली है। 


कौन खूबसूरत, तुम या अक्स जानुना

बहस कर रहा आशिक, हर गली है। 


जानलो, पूरा सच नही कहता आईना

बला की हसिन तुम हो, सुने हर गली है। 


अक्स का हकदार बन बैठा है आईना

हुस्न चोरी की फिराक में, कोई हर गली है। 


बेनकाब न निकलो बात मेरी ये मानना

बेवजह जान जाती, हर रोज, हर गली है। 


छत पर खड़े होकर बाल खुले न छोडना

चाँद देख ईद मनाने, तैयार हर गली है। 




तबदिल


काफुरि आशनाई का मैं कामिल सियाह

ऐ रंग रेज़, मत बदल छोटीसी मेरी दुनिया


आयत बने हमारे किस्से लिख रहा हु इंशा

तबदील आजमा मत, गोल है मेरी दुनिया 


सितारोंके आगे अनोखा होगा तेरा बसेरा 

मुनावरसे न बहका, नाजनी नही मेरी दुनिया


साकी गलत न समझ, जन्नत है ये मयखाना

तू नही, तेरे इश्क़ का जाम है मेरी दुनिया



फिक्र


सुबह सुबह 

घरके पीछे बग़ीचेमे 

थोई देर ही सही 

टहल लेता हु। 

कभी पानी देने के लिए ,

तो कभी बिनावजह। 


फिर ये ख्याल आता है

इन पेडोने कल ठंडभरी रात 

अकेले कैसे गुजारी होगी ?

जब मैं  कम्बल ओढ़े ,

इस सर्द मौसम में बाहर कैसे निकलू?

ये सोचते मन बना रहा था ,

तो कही ये मेरे इंतज़ार में 

डुबे तो नहीं थे न ?


जब तक हवा नहीं चलती 

सब आराम से सोते रहते है। 

धुप आनेतक ओस की बून्दोंसे 

नहाभी  लेते है 

और मै  हु उनका बावर्ची 

जो सुबह ब्रेकफास्ट लेके 

पहुंच जाता हु 

और सुनता हु उनकी शिकायते। 

शिकायत वही पुरानी 

ये हर रोज  आता नहीं। 


कुछ टहनिया लिपट भी जाती है 

मुझे फिर उनको हलके हातोंसे 

छुड़वाना पड़ता है 

अगर काटे हो तो 

थोड़े ज्यादाही सावधानी से 

लेकिन मै उनपर गुस्सा नहीं होता 

मुझे पता है ,

कसूरवार मै  ही हु। 


उन सूखे पत्तोंको वही ,

जमीपे छोड़ देता हु। 

जहा से जन्मे,

वही दफ़न हो 

और अगला जनम 

मेरे आँगन में हो। 


फ़ूलोंको छूता तक नहीं 

हम आखिर इंसान है 

और ये हात पाक बिलकुल नहीं 

लाख समझाने पर भी 

वो हमारा पीछा नहीं छोड़ते 

उनकी महक जब हमें 

छू के जाती है ,

कसमसे, यादें महका देती  है। 

अफ़सोस जताते है उनसे 

तुम तितलियोंके लिए बने हो ,

बालोंके जुड़े की 

उम्मीद मत रखना। 


सुखी टहनियोमे मुझे 

मेरा बुढ़ापा दिखाई देता है। 

फिर उन सूखे पेड़ोंको भी 

डालता हु पानी 

सोचकर कही कोई एक शाख ,

बाहर  निकलने की

फिराकमे न बैठी हो। 


चंद समय में मेरी जिम्मेदारी 

मानो ख़त्म होती है। 

एक बाप की तरह 

कर देता हु हवाले ,

उन जवान किरणोंके हाथ 

मन तो नहीं करता... 

पर पता होता है 

छाव में तो बचपन खिलता है 

धुप बनाती है -सवारती  है जिंदगी। 

अगले नस्ल को ,

एक नयी रूह देने के लिए। 


अगली सुबह फिर ,

यही सोचके ,

बगीचे में टहल आता हु ,

कही ये पेड़, फूल, पत्ते, 

मेरा इंतज़ार तो 

नहीं कर रहे थे न?



रोका न करो !


हर बात पर यकीन है, फिर भी

वादे थोड़े करो, पर निभाया करो


तुझे हम दिलके करीब रखे है

झूठा ही सही प्यार तो करो


चुप है, कारण तुमसे रुठ गए है

पर तुम बात हमसे किया करो !


तेरा चेहरा आंखोसे हटता नही

फिर भी तुम ख़्वाबोमे आया करो !


ये आंखे आज क्यो इतनी नम है

मेरे दिले गम से नाज़िर तो करो !


घर का आईना तेरा आशिक है

फुरसत से उसे अलविदा करो !


तेरे जिंदगी से दूर जाना चाहते है

पर तुम हमे कभी याद किया करो !


तेरा हात नही ले सकता हाथोंमें 

नजर मिलाने से मुझे रोका न करो !


किस्मत से मीटभी जाये फासले 

खुदा अगर है कही, उसे रोका न करो !




उड़ान

 

ये साकित आसमा, बे-हद है

उड़ान तेरे मनका दायरा है।  


चढ़ते सूरज से रुबरु करले ,

कामयाबी तेरी परछाई है  | 


उम्मीद के पर मजबूत तू कर ,

शहर की हवा थोड़ी खराब है | 


तू अक़ाब है , उंचाइसे न डर 

याद रहे, आखरी पड़ाव जमी है !

                                         




इश्क़ का नशा !


ऐ साकी, तू शराब पिला, दवा नही

ये इश्क़ है, बस एक रात का नशा नही।


गैर जिम्मे दाराना तेरी फितरत नही

ये इश्क़ है,  हमे बेदर्दीसे तोहमत नही ।


तू नही, तेरे बगैर ये राते रूमानी नही

ये इश्क़ है, खुदाकी कोई आरजू नही ।


सब कुछ तेरा, ये  दिल भी अब मेरा नही

ये इश्क़ है, एक खरीद ओ फरोक्त नही।


फैसले यही होंगे, हालात का इलाज नही

ये इश्क़ है, सुनाहै जन्नत में क़ाज़ी नही ।


जमाना खराब है, उससे कोई उम्मीद नही

ये इश्क़ है, तेरी रजामंदी जरूरी नही ।


                                                        

जश्न

टूटे आईनेको जोडकर एक तसविर बनाऊ

सैकड़ो अक्सोका का जश्न आज मैं मनाउ


खोया तुझे कई बार, अब रुक्सत न चाहू

तेरा जुनून मेंरा फितूर आज मै मनाउ


मंजिले जुदा है पर कुछ कदम साथ चलु

मुख़्तसर सफर जिंदगीभर मै मनाउ


मौसम बदलते रहेंगे, उन्हें न रोक सकु

तेरे जानेसे पहले  रुत ए बहार मै मनाउ


मोड़ बदलती रहती है जिंदगी, सोचु

और एक मुलाक़ात का जश्न कभी मै मनाउ




मिलीभगत



हर रोज सुबह

मुझे बिना पुछे

वो सुरज की किरने

तुम्हे कैसे लिपट जाती है?

और गौरतलब है

तुम क्या खिल जाती हो।


कुछ उसी तरह

नहाने के बाद

वो पानी की बुंदे

तुम्हे नही छोडती

खैर कोई बात नही

गिले बाल मेरी कमजोरी है।


हवाओंको तो बस

चाहीये होता है बहाना

तुम्हारे साथ रहे

और करे मस्तीया

शायद वही तुम्हारी

हसी खिलाई रहती है 


तुम्हे बिलकुल पता नही

रात की चादर ओढे 

जब सो जाती हो

उस मासुम चेहरेके

भाव निहारने के लिये

मै रातभर जागता हू ।


और पता नही

इस सृष्टीके कितने

अनजान अनगिनत

तत्व तुम्हे आजभी

तराशे जा रहे है

शायद तुमसे अभी तक

खुदाका मन भरा नही।



और कुछ?

ऊन जखमोंको भरने केलीये

तुम्हारा एक आसू काफी है

पर हमने तो तुम्हे रोते देखा नही

क्या अबभी कूछ सितम बाकी है?


इस इंतजार के आईनेमे

तुम्हारा एक दीदार काफी है

पर हमतो बस राह देखते रह गये

क्या आज रात अमावसकी है?


इस रुखी रुखी जिंदगी मे

आप हमे याद करना ही काफी है

पर हम करते है  इश्क बेइतहा तुमसे

क्या धडकने किसीं के लिये रूकी है?



शब्दकथा

 

शब्द येऊन सांगतात आत्मकथा 

माझे काम फक्त लिहिण्या पुरते 

सत्य - कलेचा संबंध योगायोगाचा 

मी जाणतो हे वाक्य बोलण्यापुरते 


होतात रिते वाहावून भावना 

कळत नाही कधी हि रात्र सरते 

म्हणतात नवी पहाट नवी आशा 

मी जाणतो हे नाटक दिवसापुरते 


एखाद दिवशी होतात अबोल 

अश्रुंशिवाय काही न स्फुटते 

काय म्हणावे मला कळत नाही 

मी जाणतो हे भाव शब्दांपलीकडले


येता उबग यमक जोडण्याचा

भाषा मग मरणाची चालते 

वेळ येते तुझ्या निरोपाची

मी जाणतो हे विचार बरे नव्हे




फरमाइश


अँधेरे में एक हसीं रात के साथ अल्फाज इश्क़ फर्मा रहे हो, 

और आपकी अज़ीज़ आपसे  कहे , 

"कुछ सुनाईये न !"

तब वो फरमाइश 

ठुकराई नहीं जा सकती !


फरमाइश (Request)


लब्जोंको जोडके नशीले ख़ाब बुनलु 

कोई गझल मैं लिख दू, फरमाइश तो कीजिये  


होठोंका काम कुछ और है, बात रोके नहीं 

करदु हर आरजू  पुरी, फरमाइश तो कीजिये  (wish)


हर सहर, ओस के कतरोंको समेटलू  (Morning, Dew drops)

तेरे आँचल मोती भरु, फरमाइश तो कीजिये  


चौदहवीके चांदसे लोग करते है तेरी बराबरी 

चाँदको फना करदु,  फरमाइश तो कीजिये  (destroy)


ऐ  साकी, अब शराब का नशा चढ़ता नहीं  (a loved lady)

तेरे आंखोके जाम पीलू, फरमाइश तो कीजिये  


हर रोज जान लेती हो मेरी थोड़ी थोड़ी 

तेरे जानोमे दम तोडदु , फरमाइश तो कीजिये   (Lap )